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आपके विचार से माँ ने ऐसा क्यों कहा कि लड़की होना पर लड़की जैसा मत दिखाई देना?
‘आग रोटियाँ सेंकने के लिए है। जलने के लिए नहीं। (क) इन पंक्तियों में समाज में स्त्री की किस स्थिति की ओर संकेत किया गया है? (ख) माँ ने बेटी को सचेत...
‘पाठिका थी वह धुंधले प्रकाश की कुछ तुकों और कुछ लयबद्ध पंक्तियों की’ इन पंक्तियों को पढ़कर लड़की की जो छवि आपके सामने उभरकर आ रही है उसे शब्दबद्ध...
माँ को अपर्च, बेटी ‘अंतिम पूँजी’ क्यों लग रही थी?
माँ ने बेटी को क्या-क्या सीख दी?
आपकी दृष्टि में कन्या के साथ दान की बात करना कहाँ तक उचित है?
‘कन्यादान’ कविता में माँ द्वारा जो सीख दी गई हैं, वे वर्तमान परिस्थितियों में कितनी प्रासंगिक हैं, स्पष्ट कीजिए।
‘कन्यादान’ कविता का प्रतिपाद्य लिखिए।