बिस्मिल की माता जी जब ब्याह कर आई थीं तो उस समय उनकी आयु मात्र ग्यारह वर्ष की थीं। नितांत अशिक्षित एक ग्रामीण कन्या थीं। किंतु उनके परिवार ने उन्हें बहुत अच्छे संस्कार दिए थे। वह समझदार, परिश्रमी एवं कुशाग्रबुद्धि थीं। बिस्मिल की दादी जी ने अपनी छोटी बहन को बुला लिया। दादी जी की छोटी बहन ने ही उनकी माता जी को गृह-गृहस्थी सँभालने और काम करने की शिक्षा दी। यह सब कार्य सीखकर उन्होंने स्वयं को बहुत जल्दी अपने इस नए परिवार के अनुकूल ढाल लिया। (ख) उन्होंने अपनी इच्छाशक्ति के बल पर स्वयं को कैसे शिक्षित किया? उत्तर : बिस्मिल की माता जी विवाह के समय मात्र ग्यारह वर्ष की अशिक्षित ग्रामीण कन्या थीं। परिवार के अनुरूप ढलने और बिस्मिल के होने के पाँच सात साल बाद उन्हें स्वयं ही पढ़ने का शौक पैदा हुआ। घर में आने वाली सखी-सहेलियों में से कुछ पढ़ी-लिखी थीं। उनसे मिलकर उनमें पढ़ने की इच्छा जागृत हो गई। घर का सब काम करने के बाद जो समय मिलता, उसमें वे अपनी सखियों से अक्षर ज्ञान प्राप्त करतीं। इस प्रकार अपने परिश्रम और इच्छा-शक्ति के बल पर उन्होंने स्वयं को शिक्षित करके देवनागरी की पुस्तकें पढ़नी आरंभ कर दी।