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“ रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय । टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय ।।” (क) इस दोहे में ‘मिले’ के स्थान पर ‘जुड़े’ और ‘छिटकाय’ के स्थान...
“ तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान । कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान ॥ ” इस दोहे में प्रकृति के माध्यम से मनुष्य के किस मानवीय गुण की...