CBSE Class 7 Hindi Question 3 of 3

Birju Maharaj Se Saakshatkaar — Question 3

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Question
बिराजू महाराज के अनुसार बच्चों को लय के साथ खेलने की अनुशंसा क्यों की जानी चाहिए? संगीत, नृत्य, नाटक और सभी कलाएँ बच्चों में मानवीय मूल्यों का विकास नहीं करती हैं। कला संबंधी विषयों से जुड़ाव बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। कला भी एक खेल है, जिसमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। वर्तमान समय में कला भी एक सफल माध्यम नहीं है।
Answer

कला संबंधी विषयों से जुड़ाव बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। (★) (ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि अपने ये उत्तर ही क्यों चुनें? उत्तर: (1) मेरे द्वारा इस विकल्प का चयन करने का कारण यह है कि बिरजू महाराज गंडा बाँधने को एक औपचारिक परंपरा नहीं बनाना चाहते थे। जब वे नृत्य के प्रति शिष्य के लगन, निष्ठा और समर्पण को स्वयं जाँच परख लेते थे, तभी गंडा बाँधते थे। गंडा बाँधने की परंपरा को वे एक पवित्र और पावन परंपरा मानते थे, जिसका निर्वहन वे पूरी ईमानदारी के साथ करते थे। (2) मेरे द्वारा इस विकल्प का चयन करने का कारण यह है कि बिरजू महाराज ने अपने जीवन में बचपन से लेकर बड़े होने तक अनेक उतार-चढ़ाव देखे थे। यद्यपि एक समय में उनका परिवार समृद्ध था किंतु पिता के देहांत के बाद उनकी आर्थिक परिस्थिति अच्छी नहीं रही। प्रतिकूल स्थितियों में भी उन्होंने अपने कला-कर्म का पूरी निष्ठा और लगन के साथ निर्वहन किया और नृत्य के प्रति अपने जुनून को कम नहीं होने दिया। (3) मेरे द्वारा इस विकल्प का चयन करने का कारण यह है कि नृत्य कला भी एक बौद्धिक खेल है अतः बिरजू महाराज मानते थे कि नृत्य, गीत-संगीत आदि कलाएँ बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं और वे सभी को इसके लिए प्रेरित करते थे। (विद्यार्थी अपने मित्रों के साथ चर्चा करके बताएँगे कि उनके द्वारा विकल्प चुनने के क्या कारण हैं ।) मिलकर करें मिलान पाठ में से चुनकर कुछ शब्द एवं शब्द समूह नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही संदर्भों या अवधारणाओं से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं। उत्तर: 1. – 2 2. – 6 3. – 1 4. – 4 5. – 3 6. – 5 शीर्षक • इस पाठ का शीर्षक ‘बिरजू महाराज से साक्षात्कार’ है। यदि आप इस साक्षात्कार को कोई अन्य नाम देना चाहते हैं तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? लिखिए। उत्तर: यदि मुझे इस साक्षात्कार को कोई अन्य नाम देना होता तो मैं ‘पद्मविभूषण बिरजू महाराज’ देता क्योंकि पद्मविभूषण भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है जो विविध क्षेत्रों में असाधारण सेवा अथवा उपलब्धि के लिए दिया जाता है। चूँकि बिरजू महाराज ने कथक के क्षेत्र में अपना अमूल्य और असाधारण योगदान दिया है जिसके कारण उन्हें यह गरिमामय सम्मान मिला है, इसलिए मुझे पूरा साझात्कार का उक्त शीर्षक देना उचित और पूरी तरह से प्रासंगिक प्रतीत हुआ। पंक्तियों पर चर्चा साक्षात्कार में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार लिखिए । “तुम नौकरी में बँट जाओगे। तुम्हारे अंदर का नर्तक पूरी तरह पनप नहीं पाएगा।” “लय हम नर्तकों के लिए देवता है । “ “नृत्य में शरीर, ध्यान और तपस्या का साधन होता है ।” “कथक में गर्दन को हल्के से हिलाया जाता है, चिराग की लौ के समान ।” उत्तर: नृत्य में साधना, समर्पण और ध्यान का संकेंद्रण आवश्यक होता है। यह एक पूर्णकालिक समय की माँग करने वाली विधा है । आजीविका के लिए नौकरी जैसे पूर्णकालिक साधन को अपनाने के बाद नृत्य के प्रति वह प्रतिबद्धता, समर्पण अथवा लगन नहीं रह पाएगी जो अपेक्षित है। जिस प्रकार देवता के प्रति आराधना करते समय पूरी लगन, निष्ठा और समर्पण की आवश्यकता होती हैं, उसी प्रकार नृत्य में लय ही उसकी विशिष्टता है। नर्तकों को लय को देवता तुल्य मानकर साधना करनी पड़ती है। नृत्य शरीर के माध्यम से किया जाता है। नृत्य में तपस्या और ध्यान बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए शरीर को ध्यान और तपस्या का साधन कहा गया है। जिस प्रकार चिराग की लौ बहुत ही मधुरता से धीरे-धीरे लय के साथ जलती है उसी प्रकार कथक नृत्य करते समय नर्तक अपनी गर्दन को बहुत धीरे से मधुरता और नजाकत से हिलाता है। सोच-विचार के लिए