CBSE Class 7 Hindi Question 7 of 7

Phool aur Kaanta — Question 7

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7
Question
‘उनके खयाल में शायद ही यह बात आ सके कि बूढ़े हिमालय की गोद में बच्चियाँ बनकर ये कैसे खेला करती हैं।’ • उपर्युक्त पंक्ति में ‘ही’ के प्रयोग की ओर ध्यान दीजिए। ‘ही’ वाला वाक्य नकारात्मक अर्थ दे रहा है। इसीलिए ‘ही’ वाले वाक्य में कही गई बात को हम ऐसे भी कह सकते हैं-उनके खयाल में शायद यह बात न आ सके। • इसी प्रकार नकारात्मक प्रश्नवाचक वाक्य कई बार ‘नहीं’ के अर्थ में इस्तेमाल नहीं होते हैं, जैसे-महात्मा गांधी को कौन नहीं जानता? दोनों प्रकार के वाक्यों के समान तीन-तीन उदाहरण सोचिए और इस दृष्टि से उनका
Answer

- वाक्य विश्लेषण (क) बापू को कौन नहीं जानता। हर कोई बापू को जानता है। (ख) उन्हें शायद ही इस घटना की जानकारी हो। शायद उन्हें घटना की जानकारी न हो। (ग) वह शायद ही तुम्हें देख सके। शायद उन्हें घटना की जानकारी न हो। (घ) वे लोग शायद ही उधर खेलें । वे लोग शायद इधरे न खेलें। अन्य पाठेतर हल प्रश्न बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर (क) गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम इनमें से कौन-सा है? (i) दादी माँ-शिवप्रसाद सिंह (ii) हिमालय की बेटियाँ-नागार्जुन (iii) फूले कदंब-नागार्जुन (iv) कठपुतली-भवानी प्रसाद मिश्र (ख) लेखक ने किन्हें दूर से देखा था? (i) हिमालय पर्वत को (ii) हिमालय की चोटियों को (iii) हिमालय से निकलने वाली नदियों को (iv) हिमालय के समतल मैदानों को (ग) नदियों की बाल लीला कहाँ देखी जा सकती है? (i) घाटियों में । (ii) नंगी पहाड़ियों पर (iii) उपत्यकाओं में (iv) उपर्युक्त सभी (घ) निम्नलिखित में से किस नदी का नाम पाठ में नहीं आया है? (i) रांची (ii) सतलुज (iii) गोदावरी (iv) कोसी (ङ) बेतवा नदी को किसकी प्रेयसी के रूप चित्रित किया गया है? (i) यक्ष की (ii) कालिदास की (iii) मेघदूत की (iv) हिमालय की (च) लेखक को नदियाँ कहाँ अठखेलियाँ करती हुई दिखाई पड़ती हैं? (i) हिमालय के मैदानी इलाकों में (ii) हिमालय की गोद में (iii) सागर की गोद में (iv) घाटियों की गोद में (छ) लेखक ने नदियों और हिमालय का क्या रिश्ता कहा है? (i) पिता-पुत्र का (ii) पिता-पुत्रियों का (ii) माँ-बेटे का (iv) भाई-बहन का (ज) लेखक किस नदी के किनारे बैठा था? (i) गोदावरी (ii) सतलुज (iii) गंगा (iv) यमुना उत्तर (क) (ii) (ख) (iii) (ग) (iv) (घ) (iii) (ङ) (iii) (च) (ii) (छ) (ii) (ज) (ii) अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (क) लेखक ने हिमालय की बेटियाँ किसे कहा है और क्यों? उत्तर- लेखक ने नदियों को हिमालय की बेटियाँ कहा है, क्योंकि उसकी उत्पत्ति हिमालय के बर्फ पिघलने से हुई है। (ख) लेखक के मन में नदियों के प्रति कैसे भाव थे? उत्तर- लेखक के मन में नदियों के प्रति आदर और श्रद्धा के भाव थे। (ग) दूर से देखने पर नदियाँ लेखक को कैसी लगती थीं? उत्तर- दूर से देखने पर लेखक को नदियाँ गंभीर, शांत और अपने आप में खोई हुई, किसी शिष्ट महिला की भाँति प्रतीत होती थी। (घ) नदियों की बाल-लीला कहाँ देखने को मिलती है? उत्तर- नदियों की बाल-लीला हिमालय की पहाड़ियों, हरी-भरी घाटियों तथा गुफाओं में देखने को मिलती है। (ङ) समुद्र को सौभाग्यशाली क्यों कहा गया है? उत्तर- समुद्र को सौभाग्यशाली इसलिए कहा गया है, क्योंकि हिमालय के हृदय से निकली उसकी दो प्रिय पुत्रियाँ सिंधु और ब्रह्मपुत्र को धारण करने का सौभाग्य समुद्र को ही प्राप्त हुआ। लघु उत्तरीय प्रश्न (क) नदियों की धाराओं में डुबकियाँ लगाना लेखक को कैसा लगता था? उत्तर- नदियों की धाराओं में डुबकियाँ लगाने पर उसे माँ, दादी, मौसी या मामी की गोद जैसा ममत्व प्रतीत होता था। (ख) सिंधु और ब्रह्मपुत्र के उद्गम के बारे में लेखक का क्या विचार है? उत्तर- लेखक को सिंधु और बह्मपुत्र के उद्गम के बारे में विचार है कि सिंधु और ब्रह्मपुत्र के उद्गम के कोई विशेष स्थान नहीं थे तो हिमालय के हृदय से निकली, करुणा की बूंदों से निर्मित ऐसी दो धाराएँ हैं जो बूंद-बूंद के एकत्रित होने पर महानदी के रूप में परिवर्तित हुई हैं। (ग) हिमालय अपना सिर क्यों धुनता है? उत्तर- हिमालय की स्थिति वृद्ध पिता के समान है जो अपने नटखट बेटियों को घर छोड़कर जाता हुआ देखता है और उसे कुछ भी नहीं बोल पाता है, इसलिए वह अपना सिर धुनता है। दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (क) काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता क्यों कहा है? उत्तर- मानव जाति के विकास में नदियों का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। यह जल प्रदान कर सदियों से पूजनीय व मनुष्य हेतु कल्याणकारी रही हैं। नदियाँ लोगों के द्वारा दूषित किया गया जल जैसे-कपड़े धोना, पशु नहलाना व अन्य कूड़ा-करकट भी अपने साथ ही लेकर जाती हैं। फिर भी नदियाँ हमारे लिए कल्याण ही करती हैं। मानव के आधुनिकीकरण में जैसेबिजली बनाना, सिंचाई के नवीन साधनों आदि में इन्होंने पूरा सहयोग दिया है। मानव ही नहीं अपितु पशु-पक्षी, पेड़-पौधों आदि के लिए जल भी उपलब्ध कराया है। इसलिए हम कह सकते हैं कि काका कालेलकर का नदियों को लोकमाता की संज्ञा देना कोई अतिशयोक्ति नहीं। (ख) लेखक ने सिंधु और ब्रह्मपुत्र की क्या विशेषताएँ बताई हैं? उत्तर- लेखक ने सिंधु और ब्रहमपुत्र की विशेषताएँ बतायी हैं कि ये दोनों नदियाँ ऐसी हैं कि जो दयालु हिमालय के पिघले हुए दिल की एक-एक बूंद से बनी हैं। इनका स्वरूप विशाल और वृहत है। इनकी सुंदरता इतनी लुभावनी है कि समुद्र भी पर्वतराज की इन दोनों बेटियों का हाथ सँभालने में सौभाग्यशाली समझते हैं। (ग) हिमालय से निकलने वाली प्रमुख नदियों के नाम लिखिए तथा बताइए कि लेखक ने उनके अस्तित्व के विषय में क्या विचार किया है? उत्तर- हिमालय से निकलने वाली प्रमुख नदियों के नाम हैं-सिंधु, ब्रह्मपुत्र, रावी, सतलुज, व्यास, चेनाब, झेलम, काबुल, कपिशा, गंगा, यमुना, सरयू, गंडक, कोसी आदि। लेखक का विचार है कि इन नदियों का अपना कोई अस्तित्व नहीं है। ये वास्तव में हिमालय के कृपा पात्र हैं जिसके पिघले हुए दिल की बूंदें है, वे बँदे एकत्रित होकर नदी का आकार ले लिया है और समुद्र की ओर बहती हुई समुद्र में जाकर मिलती हैं। निष्कर्ष में लेखक का विचार है कि हिमालय पर जमी बर्फ के पिघलने से ही इन नदियों का उद्गम होता है। इसलिए हिमालय के बिना नदियों का कोई अस्तित्व नहीं है। (घ) इस पाठ का उद्देश्य क्या है? उत्तर- इस पाठ का उद्देश्य लेखक ने हिमालय से निकलने वाली नदियों के नाम, उद्गम स्थल, उनके सदैव परिवर्तन होने वाले पल के रूप से परिचित करवाना है। हिमालय को पिता, नदियों को पुत्रियाँ व सागर को उनका प्रेमी माना गया है। लेखक ने यह बताना चाहा है कि सिंधु और ब्रह्मपुत्र ऐसी वृहत नदियाँ हैं जो हिमालय के हृदय से पिघली बूंदों से अपना अस्तित्व पाती हैं। इसे महानदी भी कहते हैं। मूल्यपरक प्रश्न (क) आप नदियों को किस रूप में देखते हैं? उनकी सफ़ाई के लिए क्या प्रयास करते हैं या कर सकते हैं? उत्तर- हम नदियों को माँ की तरह कल्याणकारी रूप में देखते हैं, ये सदैव पूजनीय हैं। नदियाँ हमारी सारी आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं। अतः हमें इनके जल को प्रदूषित होने से बचाना चाहिए। इसके लिए हम यह प्रयास करते हैं कि नदियों में किसी भी प्रकार की गंदगी न फेंकें या डालें । हम नदी के किनारे कपड़े धोने, मूर्तियों को प्रवाहित करने तथा नालों के गंदे पानी डालने का सख्त विरोध करते हैं। हम सदैव नदी की स्वच्छता अभियान में सक्रिय रूप से भागीदार होते हैं।