Chandragahna Se Lautati Ber — Question 12
Back to all questions- कविता में आए कुछ मुहावरे- हृदय का दान देना-(प्रेम करना)-पद्मावती के रूप सौंदर्य का वर्णन सुनते ही रत्नसेन ने उसे अपने हृदय का दान दे दिया। सयानी होना-(समझदार होना)-मिनी को देखते ही काबुली वाले को याद आया कि उसकी अपनी बेटी भी सयानी हो गई होगी। हाथ पीले करना-(विवाह करना)-अपनी बिटिया के हाथ पीले करने के बाद गरीब माँ-बाप ने चैन की साँस ली। पैरों के तले होना-(एकदम निकट होना)-कवि जहाँ बैठा था वहीं पैरों के तले ही पोखर था। ध्यान-निद्रा त्यागना-(सजग हो जाना)-मछली देखते ही बगुला ध्यान निद्रा त्याग देता है। गले के नीचे डालना-(खा जाना)-भूखा भिखारी सूखी रोटियाँ गले के नीचे डालता जा रहा था। हृदय चीरना-(दुख पहुँचाना)-प्रेमी युगल द्वारा एक-दूसरे के साथ विश्वासघात करना हृदय चीरने वाली बात होती है। पाठेतर सक्रियता प्रस्तुत अपठित कविता के आधार पर उसके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए- देहात का दृश्य अरहर कल्लों से भरी हुई फलियों से झुकती जाती है, उस शोभासागर में कमला ही कमला बस लहराती है। सरसों दानों की लड़ियों से दोहरी-सी होती जाती है, भूषण का भार सँभाल नहीं सकती है कटि बलखाती है। है चोटी उस की हिरनखुरी के फूलों से गूंथ कर सुंदर, अन-आमंत्रित आ पोलंगा है इंगित करता हिल-हिल कर। हैं मसें भींगती गेहूँ की तरुणाई फूटी आती है, यौवन में माती मटरबेलि अलियों से आँख लड़ाती है। लोने-लोने वे घने चने क्या बने-बने इठलाते हैं, हौले-हौले होली गा-गा मुँघरू पर ताल बजाते हैं। हैं जलाशयों के ढालू भीटों पर शोभित तृण शालाएँ, जिन में तप करती कनक वरण हो जग बेलि-अहिबालाएँ। हैं कंद धरा में दाब कोष ऊपर तक्षक बन झूम हरे, अलसी के नील गगन में मधुकर दृग-तारों से घूम रहे। मेथी में थी जो विचर रही तितली सो सोए में सोई, उस की सुगंध-मादकता में सुध-बुध खो देते सब कोई। हिरनखुरी – बरसाती लता भीटा – ढूह, टीले के शक्ल की जमीन