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Question कवि ने प्रकृति का मानवीकरण कहाँ-कहाँ किया है?
- कवि ने निम्न स्थलों पर प्रकृति का मानवीकरण किया है यह हरा ठिगना चना, बाँधे मुरैठा शीश पर छोटे गुलाबी फूल का, सज कर खड़ा है। पास ही मिल कर उगी है बीच में अलसी हठीली देह की पतली, कमर की है लचीली, नील फूले फूल को सिर पर चढ़ा कर कह रही है, जो छुए यह दें हृदय का दान उसको। और सरसों की न पूछो हो गई सबसे सयानी, हाथ पीले कर लिए हैं। ब्याह-मंडप में पधारी। फाग गाता मास फागुन हैं कई पत्थर किनारे पी रहे चुपचाप पानी, प्यास जाने कब बुझेगी!