CBSE Class 9 Hindi Question 1 of 16

Lhasa Ki Or — Question 1

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Question
थोड्ला के पहले के आखिरी गाँव पहुँचने पर भिखमंगे के वेश में होने के बावजूद लेखक को ठहरने के लिए उचित स्थान मिला जबकि दूसरी यात्रा के समय भद्र वेश भी उन्हें उचित स्थान नहीं दिला सका। क्यों?
Answer

- इसका मुख्य कारण था-संबंधों का महत्त्व। तिब्बत में इस मार्ग पर यात्रियों के लिए एक-जैसी व्यवस्थाएँ नहीं थीं। इसलिए वहाँ जान-पहचान के आधार पर ठहरने का उचित स्थान मिल जाता था। बिना जान-पहचान के यात्री को भटकना पड़ता था। दूसरे, तिब्बत के लोग शाम छः बजे के बाद छङ पीकर मस्त हो जाते थे। तब वे यात्रियों की सुविधा का ध्यान नहीं रखते थे।

ल्हासा की ओर — विस्तृत अध्ययन | Bright Tutorials
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हिंदी | क्षितिज — ल्हासा की ओर (विस्तृत) विस्तृत अध्ययन सामग्री

ल्हासा की ओर — राहुल सांकृत्यायन | विस्तृत अध्ययन

लेखक परिचय — राहुल सांकृत्यायन (1893-1963)

"महापंडित" की उपाधि। हिंदी यात्रा साहित्य के जनक। 45+ देशों की यात्रा। तिब्बत से दुर्लभ बौद्ध पांडुलिपियाँ लाए। प्रमुख रचनाएँ: वोल्गा से गंगा, मेरी जीवन यात्रा। बहुभाषाविद् — 36 भाषाओं के ज्ञाता।

विस्तृत यात्रा विवरण

1929-30 में राहुल जी ने नेपाल के रास्ते तिब्बत की यात्रा की। यह तीसरी तिब्बत यात्रा थी। मार्ग: नेपाल → डांगरा → तिंगरी → ल्हासा। तिब्बती साथी सुमति (बौद्ध भिक्षु) उनके साथ थे।

रास्ते की विशेषताएँ: 17,000 फीट ऊँचे दर्रे, बर्फीले तूफ़ान, डाकुओं का भय, भूखे-प्यासे चलना। तिब्बत में अनूठी सामाजिक व्यवस्था — स्त्रियाँ स्वतंत्र, बहुपति विवाह, डकैती एक व्यवसाय, बौद्ध मठों का प्रभुत्व।

आदर्श उत्तर

प्रश्न: तिब्बत की सामाजिक व्यवस्था भारत से कैसे भिन्न थी?

उत्तर: तिब्बत की सामाजिक व्यवस्था भारत से कई प्रकार से भिन्न थी। पहला, तिब्बत में स्त्रियों को पुरुषों से अधिक स्वतंत्रता प्राप्त थी — वे व्यापार करती थीं और घर-बाहर दोनों के निर्णय लेती थीं। दूसरा, तिब्बत में बहुपति विवाह (एक स्त्री कई पतियों की) प्रथा प्रचलित थी। तीसरा, वहाँ डकैती को एक सामान्य व्यवसाय माना जाता था — लोग बिना किसी संकोच के इसे अपना पेशा बताते थे। चौथा, जाति-पाँति का कोई बंधन नहीं था — कोई छुआछूत नहीं। पाँचवाँ, बौद्ध धर्म का गहरा प्रभाव था — मठ और लामा समाज में सर्वोच्च स्थान रखते थे।