CBSE Class 9 Hindi Question 16 of 16

Lhasa Ki Or — Question 16

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Question
यदि आज के समय में तिब्बत की यात्रा की जाय तो यह यात्रा राहुल जी की यात्रा से पूरी तरह भिन्न होगी। 1930 में तिब्बत में आना-जाना आसान न था। ऐसा राजनैतिक कारणों से था। आज उचित पासपोर्ट के साथ आसानी से यह यात्रा की जा सकती है। अब भिखमंगों के वेश में यात्रा करने की आवश्यकता नहीं है। अब यात्रा के लिए विभिन्न साधनों का प्रयोग किया जा सकता है। छात्र स्वयं लिखें। अपठित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए- आम दिनों में समुद्र किनारे के इलाके बेहद खूबसूरत लगते हैं। समुद्र लाखों लोगों को भोजन दे
Answer

- भीषण भूकंप के कारण समुद्र में आने वाली तूफ़ानी लहरों को सुनामी कहा जाता है। यह आसपास के इलाकों को नष्ट कर देता है। दुख जीवन को साफ़-सुथरा बनाता है। अर्थात् व्यक्ति दुख से निपटने के उपाय सोचता है, उनसे छुटकारा पाता है। भविष्य में इससे बचने की तैयारी कर लेता है और नई आशा, उमंग और उल्लास के साथ जीवन शुरू करता है। मेघना और अरुण सुनामी में फँस गए थे, वे दो दिन तक समुद्र में तैरते रहे। कई बार वे समुद्री जीवों का शिकार होने से बचे और अंत में किनारे लगकर बच गए। मैगी ने समुद्र में उठ रही दस मीटर ऊँची लहरों के बीच अपना बेड़ा उतार दिया। उसमें अपने परिजनों को बिठाकर किनारे आने के लिए संघर्ष करने लगी। उसके बेड़े में 41 लोग और भी थे। बुलंद इरादे, अहमियत “सुनामी का कहर’ या प्रकृति का क्रोध-सुनामी। अन्य पाठेतर हल प्रश्न लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

ल्हासा की ओर — विस्तृत अध्ययन | Bright Tutorials
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हिंदी | क्षितिज — ल्हासा की ओर (विस्तृत) विस्तृत अध्ययन सामग्री

ल्हासा की ओर — राहुल सांकृत्यायन | विस्तृत अध्ययन

लेखक परिचय — राहुल सांकृत्यायन (1893-1963)

"महापंडित" की उपाधि। हिंदी यात्रा साहित्य के जनक। 45+ देशों की यात्रा। तिब्बत से दुर्लभ बौद्ध पांडुलिपियाँ लाए। प्रमुख रचनाएँ: वोल्गा से गंगा, मेरी जीवन यात्रा। बहुभाषाविद् — 36 भाषाओं के ज्ञाता।

विस्तृत यात्रा विवरण

1929-30 में राहुल जी ने नेपाल के रास्ते तिब्बत की यात्रा की। यह तीसरी तिब्बत यात्रा थी। मार्ग: नेपाल → डांगरा → तिंगरी → ल्हासा। तिब्बती साथी सुमति (बौद्ध भिक्षु) उनके साथ थे।

रास्ते की विशेषताएँ: 17,000 फीट ऊँचे दर्रे, बर्फीले तूफ़ान, डाकुओं का भय, भूखे-प्यासे चलना। तिब्बत में अनूठी सामाजिक व्यवस्था — स्त्रियाँ स्वतंत्र, बहुपति विवाह, डकैती एक व्यवसाय, बौद्ध मठों का प्रभुत्व।

आदर्श उत्तर

प्रश्न: तिब्बत की सामाजिक व्यवस्था भारत से कैसे भिन्न थी?

उत्तर: तिब्बत की सामाजिक व्यवस्था भारत से कई प्रकार से भिन्न थी। पहला, तिब्बत में स्त्रियों को पुरुषों से अधिक स्वतंत्रता प्राप्त थी — वे व्यापार करती थीं और घर-बाहर दोनों के निर्णय लेती थीं। दूसरा, तिब्बत में बहुपति विवाह (एक स्त्री कई पतियों की) प्रथा प्रचलित थी। तीसरा, वहाँ डकैती को एक सामान्य व्यवसाय माना जाता था — लोग बिना किसी संकोच के इसे अपना पेशा बताते थे। चौथा, जाति-पाँति का कोई बंधन नहीं था — कोई छुआछूत नहीं। पाँचवाँ, बौद्ध धर्म का गहरा प्रभाव था — मठ और लामा समाज में सर्वोच्च स्थान रखते थे।