CBSE Class 9 Hindi Question 9 of 16

Lhasa Ki Or — Question 9

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Question
हालाँकि उस वक्त मेरा भेष ऐसा नहीं था कि उन्हें कुछ भी ख़याल करना चाहिए था।’-उक्त कथन के अनुसार हमारे आचार-व्यवहार के तरीके वेशभूषा के आधार पर तय होते हैं। आपकी समझ से यह उचित है अथवा अनुचित, विचार व्यक्त करें।
Answer

- यह बात सच है कि हमारे आचार-व्यवहार के तरीके वेशभूषा के आधार पर तय होते हैं। हम अच्छा पहनावा देखकर किसी को अपनाते हैं तो गंदे कपड़े देखकर उसे दुत्कारते हैं। लेखक भिखमंगों के वेश में यात्रा कर रहा था। इसलिए उसे यह अपेक्षा नहीं थी कि शेकर विहार का भिक्षु उसे सम्मानपूर्वक अपनाएगा। मेरे विचार से वेशभूषा देखकर व्यवहार करना पूरी तरह ठीक नहीं है। अनेक संत-महात्मा और भिक्षु साधारण वस्त्र पहनते हैं किंतु वे उच्च चरित्र के इनसान होते हैं, पूज्य होते हैं। परंतु यह बात भी सत्य है कि वेशभूषा से मनुष्य की पहचान होती है। हम पर पहला प्रभाव वेशभूषा के कारण ही पड़ता है। उसी के आधार पर हम भले-बुरे की पहचान करते हैं।

ल्हासा की ओर — विस्तृत अध्ययन | Bright Tutorials
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हिंदी | क्षितिज — ल्हासा की ओर (विस्तृत) विस्तृत अध्ययन सामग्री

ल्हासा की ओर — राहुल सांकृत्यायन | विस्तृत अध्ययन

लेखक परिचय — राहुल सांकृत्यायन (1893-1963)

"महापंडित" की उपाधि। हिंदी यात्रा साहित्य के जनक। 45+ देशों की यात्रा। तिब्बत से दुर्लभ बौद्ध पांडुलिपियाँ लाए। प्रमुख रचनाएँ: वोल्गा से गंगा, मेरी जीवन यात्रा। बहुभाषाविद् — 36 भाषाओं के ज्ञाता।

विस्तृत यात्रा विवरण

1929-30 में राहुल जी ने नेपाल के रास्ते तिब्बत की यात्रा की। यह तीसरी तिब्बत यात्रा थी। मार्ग: नेपाल → डांगरा → तिंगरी → ल्हासा। तिब्बती साथी सुमति (बौद्ध भिक्षु) उनके साथ थे।

रास्ते की विशेषताएँ: 17,000 फीट ऊँचे दर्रे, बर्फीले तूफ़ान, डाकुओं का भय, भूखे-प्यासे चलना। तिब्बत में अनूठी सामाजिक व्यवस्था — स्त्रियाँ स्वतंत्र, बहुपति विवाह, डकैती एक व्यवसाय, बौद्ध मठों का प्रभुत्व।

आदर्श उत्तर

प्रश्न: तिब्बत की सामाजिक व्यवस्था भारत से कैसे भिन्न थी?

उत्तर: तिब्बत की सामाजिक व्यवस्था भारत से कई प्रकार से भिन्न थी। पहला, तिब्बत में स्त्रियों को पुरुषों से अधिक स्वतंत्रता प्राप्त थी — वे व्यापार करती थीं और घर-बाहर दोनों के निर्णय लेती थीं। दूसरा, तिब्बत में बहुपति विवाह (एक स्त्री कई पतियों की) प्रथा प्रचलित थी। तीसरा, वहाँ डकैती को एक सामान्य व्यवसाय माना जाता था — लोग बिना किसी संकोच के इसे अपना पेशा बताते थे। चौथा, जाति-पाँति का कोई बंधन नहीं था — कोई छुआछूत नहीं। पाँचवाँ, बौद्ध धर्म का गहरा प्रभाव था — मठ और लामा समाज में सर्वोच्च स्थान रखते थे।