CBSE Class 9 Hindi Question 5 of 13

Premchand Ke Phate Joote — Question 5

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5
Question
आपने यह व्यंग्य पढ़ा। इसे पढ़कर आपको लेखक की कौन-सी बातें आकर्षित करती हैं?
Answer

- मुझे इस व्यंग्य की सबसे आकर्षक बात लगती है-विस्तारण शैली। लेखक एक संदर्भ से दूसरे संदर्भ की ओर बढ़ता चला जाता है। वह बूंद में समुद्र खोजने का प्रयत्न करता है। जैसे बीज में से क्रमश: अंकुर का, फिर पल्लव का, फिर पौधे और तने का; तथा अंत में फूल-फल का विकास होता चला जाता है, उसी प्रकार इस निबंध में प्रेमचंद के फटे जूते से बात शुरू होती है। वह बात खुलते-खुलते प्रेमचंद के पूरे व्यक्तित्व को उद्घाटित कर देती है। बात से बात निकालने की यह व्यंग्य शैली बहुत आकर्षक बन पड़ी है।

प्रेमचंद के फटे जूते — विस्तृत अध्ययन | Bright Tutorials
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हिंदी | क्षितिज — प्रेमचंद के फटे जूते (विस्तृत) विस्तृत अध्ययन सामग्री

प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई | विस्तृत अध्ययन

लेखक परिचय — हरिशंकर परसाई (1924-1995)

हिंदी व्यंग्य साहित्य के शिखर पुरुष। प्रमुख रचनाएँ: विकलांग श्रद्धा का दौर, और अंत में, तब की बात और थी। साहित्य अकादेमी पुरस्कार। सामाजिक विसंगतियों पर तीखा व्यंग्य करने में सिद्धहस्त।

विस्तृत विश्लेषण

परसाई ने प्रेमचंद की तस्वीर में फटे जूतों को देखा। इस तस्वीर में प्रेमचंद अपनी पत्नी शिवरानी देवी के साथ हैं। प्रेमचंद के पैरों में कैनवास के जूते हैं जिनमें से अँगूठा बाहर झाँक रहा है, लेकिन चेहरे पर मुस्कान है।

परसाई इस विरोधाभास से प्रभावित होते हैं — फटे जूते = गरीबी + मुस्कान = आत्मसम्मान। प्रेमचंद ने कभी पैसों के लिए अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। वे ईमानदारी से लिखते रहे, भले ही गरीबी झेलनी पड़ी।

आदर्श उत्तर

प्रश्न: "फटे जूते" प्रेमचंद के किस गुण के प्रतीक हैं?

उत्तर: "फटे जूते" प्रेमचंद की ईमानदारी, सादगी और सिद्धांतों से समझौता न करने की प्रवृत्ति के प्रतीक हैं। परसाई कहते हैं कि जिस व्यक्ति के जूते फटे हैं, उसने या तो बहुत चला है या दुनिया से समझौता नहीं किया। प्रेमचंद ने चुना — ईमानदारी, भले ही जूते फटे। जिन लोगों ने समझौता किया, उनके जूते कभी नहीं फटे लेकिन उनकी आत्मा फटी। फटे जूते गरीबी नहीं, बल्कि नैतिक श्रेष्ठता के प्रतीक हैं।