CBSE Class 9 Hindi Question 1 of 13

Premchand Ke Phate Joote — Question 1

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Question
हरिशंकर परसाई ने प्रेमचंद का जो शब्दचित्रं हमारे सामने प्रस्तुत किया है उससे प्रेमचंद के चित्रं सी विशेषताएँ उभरकर आती हैं?
Answer

- ‘प्रेमचंद के फटे जूते’ नामक व्यंग्य को पढ़कर प्रेमचंद के व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताएँ उभरकर सामने आती हैं- संघर्षशील लेखक- प्रेमचंद आजीवन संघर्ष करते रहे। उन्होंने मार्ग में आने वाली चट्टानों को ठोकरें मारीं। अगल-बगल के रास्ते नहीं खोजे। समझौते नहीं किए। लेखक के शब्दों में “तुम किसी सख्त चीज़ को ठोकर मारते रहे हो। ठोकर मार-मारकर अपना जूता फाड़ लिया।” अपराजेय व्यक्तित्व- प्रेमचंद का व्यक्तित्व अपराजेय था। उन्होंने कष्ट सहकर भी कभी हार नहीं मानी। यदि वे मनचाहा परिवर्तन नहीं कर पाए, तो कम-से-कम कमजोरियों पर हँसे तो सही। उन्होंने निराश-हताश जीने की बजाय मुसकान बनाए रखी। उनकी नज़रों में तीखा व्यंग्य और आत्मविश्वास था। लेखक के शब्दों में–“यह कैसा आदमी है, जो खुद तो फटे जूते पहने फोटो खिंचा रहा है, पर किसी पर हँस भी रहा है।” कष्टग्रस्त जीवन- प्रेमचंद जीवन-भर आर्थिक संकट झेलते रहे। उन्होंने गरीबी को सहर्ष स्वीकार किया। वे बहुत सीधे-सादे वस्त्र पहनते थे। उनके पास पहनने को ठीक-से जूते भी नहीं थे। फिर भी वे हीनता से पीड़ित नहीं थे। उन्होंने फोटो खिंचवाने में भी अपनी सहजता बनाए रखी। सहजता- प्रेमचंद अंदर-बाहर से एक थे। लेखक के शब्दों में-”इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी-इसमें पोशाकें बदलने का गुण नहीं है।” मर्यादित जीवन- प्रेमचंद ने जीवन-भर मानवीय मर्यादाओं को निभाया। उन्होंने अपने नेम-धरम को, अर्थात् लेखकीय गरिमा को बनाए रखा। वे व्यक्ति के रूप में तथा लेखक के रूप में श्रेष्ठ आचरण  करते रहे।

प्रेमचंद के फटे जूते — विस्तृत अध्ययन | Bright Tutorials
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हिंदी | क्षितिज — प्रेमचंद के फटे जूते (विस्तृत) विस्तृत अध्ययन सामग्री

प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई | विस्तृत अध्ययन

लेखक परिचय — हरिशंकर परसाई (1924-1995)

हिंदी व्यंग्य साहित्य के शिखर पुरुष। प्रमुख रचनाएँ: विकलांग श्रद्धा का दौर, और अंत में, तब की बात और थी। साहित्य अकादेमी पुरस्कार। सामाजिक विसंगतियों पर तीखा व्यंग्य करने में सिद्धहस्त।

विस्तृत विश्लेषण

परसाई ने प्रेमचंद की तस्वीर में फटे जूतों को देखा। इस तस्वीर में प्रेमचंद अपनी पत्नी शिवरानी देवी के साथ हैं। प्रेमचंद के पैरों में कैनवास के जूते हैं जिनमें से अँगूठा बाहर झाँक रहा है, लेकिन चेहरे पर मुस्कान है।

परसाई इस विरोधाभास से प्रभावित होते हैं — फटे जूते = गरीबी + मुस्कान = आत्मसम्मान। प्रेमचंद ने कभी पैसों के लिए अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। वे ईमानदारी से लिखते रहे, भले ही गरीबी झेलनी पड़ी।

आदर्श उत्तर

प्रश्न: "फटे जूते" प्रेमचंद के किस गुण के प्रतीक हैं?

उत्तर: "फटे जूते" प्रेमचंद की ईमानदारी, सादगी और सिद्धांतों से समझौता न करने की प्रवृत्ति के प्रतीक हैं। परसाई कहते हैं कि जिस व्यक्ति के जूते फटे हैं, उसने या तो बहुत चला है या दुनिया से समझौता नहीं किया। प्रेमचंद ने चुना — ईमानदारी, भले ही जूते फटे। जिन लोगों ने समझौता किया, उनके जूते कभी नहीं फटे लेकिन उनकी आत्मा फटी। फटे जूते गरीबी नहीं, बल्कि नैतिक श्रेष्ठता के प्रतीक हैं।