- कश्मीर हमारे देश के उत्तरी भाग में स्थित है। यह पर्वतीय प्रदेश है। यहाँ का भू–भाग ऊँचा-नीचा है। कश्मीर के ऊँचे पहाड़ों पर सरदियों में बरफ़ पड़ती है। यह सुंदर प्रदेश हिमालय की गोद में बसा है। अपनी विशेष सुंदरता के कारण यह मुगल बादशाहों को विशेष प्रिय रहा है। मुगल सम्राज्ञी ने उसकी सुंदरता पर मुग्ध होकर कहा था, ‘यदि धरती पर कहीं स्वर्ग है तो यहीं है।’ कश्मीर में झेलम, सिंधु आदि नदियाँ बहती हैं जिससे यहाँ हरियाली रहती है। यहाँ के हरे-भरे वन, सेब के बाग, खूबसूरत घाटियाँ, विश्व प्रसिद्ध डल झील, इसमें तैरते खेत, शिकारे, हाउसबोट आदि सैलानियों के आकर्षण का केंद्र हैं। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता देखने के लिए देश से नहीं वरन विदेशी पर्यटक भी आते हैं। पर्यटन उद्योग राज्य की आमदनी में अपना विशेष योगदान देता है। वास्तव में कश्मीर जितना सुंदर है उतने ही सुंदर यहाँ के लोग भी हैं। ये मृदुभाषी हँसमुख और मिलनसार प्रकृति के हैं। कश्मीर वासी विशेष रूप से परिश्रमी होते हैं। वास्तव में कश्मीर धरती का स्वर्ग है। अन्य पाठेतर हल प्रश्न लघु उत्तरीय प्रश्न
वाख — ललद्यद | विस्तृत अध्ययन
ललद्यद — कश्मीर की संत कवयित्री
14वीं शताब्दी, कश्मीर। शैव दर्शन की अनुयायी। "लल्ला" नाम से प्रसिद्ध। कश्मीरी भाषा में "वाख" (वाक् = वाणी) लिखीं। कबीर से लगभग 100 वर्ष पूर्व। आत्मज्ञान, ईश्वर खोज, और सांसारिक मोह-माया से मुक्ति का उपदेश।
आदर्श उत्तर
उत्तर: ललद्यद और कबीर दोनों ने बाहरी आडंबर का विरोध किया और आत्मज्ञान पर बल दिया। ललद्यद शैव दर्शन की अनुयायी थीं — शिव ही सर्वत्र है। कबीर निर्गुण भक्ति के — राम (निराकार ईश्वर) सबमें है। दोनों ने कहा कि मंदिर-मस्जिद में ईश्वर नहीं, अपने भीतर है। ललद्यद मध्यम मार्ग (न अधिक भोग, न अधिक त्याग) की समर्थक थीं। कबीर ने भी अतिवाद का विरोध किया। दोनों लोकभाषा में लिखकर जनसाधारण तक पहुँचे।