CBSE Class 6 Hindi Question 2 of 2

Rahim Ke Dohe — Question 2

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Question
“ तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान । कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान ॥ ” इस दोहे में प्रकृति के माध्यम से मनुष्य के किस मानवीय गुण की बात की गई है ? प्रकृति से हम और क्या-क्या सीख सकते हैं?
Answer

इस दोहे में प्रकृति के माध्यम से परोपकार के लिए प्रेरित किया गया है। पेड़ और सरोवर दूसरों की भलाई के लिए ही क्रमशः फल और पानी अपने में समाहित करके रखते हैं। वे स्वयं उनका उपयोग नहीं करते । प्रकृति हमें देने की भावना सिखाती है। हमें भी प्रकृति की भाँति ही प्यार, सम्मान और आशीर्वाद देने की भावना को बढ़ावा देना चाहिए। प्रकृति हमें मुसीबतों का सामना करने तथा धैर्यवान बनने की शिक्षा देती है। प्रकृति से हमें हर परिस्थिति में ढलना सीखना चाहिए। पवन से हमें निरंतर चलते रहने अर्थात सतत प्रयास करने की शिक्षा मिलती है। इसी प्रकार आग स्वयं जलकर दूसरों को गर्मी देने की सीख देती है और हरी-भरी प्रकृति मानव में उमंग का संचार करती है। धरती से हमें सहनशक्ति की शिक्षा मिलती है। आज हमें प्रकृति से शिक्षा लेकर उसकी सुरक्षा के लिए कार्य करना चाहिए। शब्दों की बात हमने शब्दों के नए-नए रूप जाने और समझे। अब कुछ करके देखें- शब्द – सपंदा कविता में आए कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन शब्दों को आपकी मातृभाषा में क्या कहते हैं? लिखिए। उत्तर : कविता में आए शब्द मातृभाषा में समानार्थक शब्द तरुवर तरु, वृक्ष, पेड़ बिपति विपत्ति, मुसीबत, संकट छिटकाय छिटकना, बिखरना सुजान चतुर, सयाना, समझदार सरवर सरोवर, तालाब साँचे सच्चा, सही कपाल खोपड़ी, मस्तक शब्द एक अर्थ अनेक ” रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून । पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून ॥” इस दोहे में ‘पानी’ शब्द के तीन अर्थ हैं- सम्मान, जल, चमक। इसी प्रकार कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। आप भी इन शब्दों के तीन-तीन अर्थ लिखिए। आप इस कार्य में शब्दकोश, इंटरनेट, शिक्षक या अभिभावकों की सहायता भी ले सकते हैं। कल – ___________, ___________, ___________ पत्र – ___________, ___________, ___________ कर – ___________, ___________, ___________ फल – ___________, ___________, ___________ उत्तर : कल – चैन – मशीन – बीता हुआ और आने वाला दिन पत्र – – पत्ता चिट्ठी – अखबार कर – हाथ – टैक्स – किरण फल – परिणाम – वृक्ष का फल – भाले की नोंक पाठ से आगे आपकी बात “ रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि । जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि ॥” इस दोहे का भाव है- न कोई बड़ा है और न ही कोई छोटा है। सबके अपने-अपने काम हैं, सबकी अपनी-अपनी उपयोगिता और महत्ता है। चाहे हाथी हो या चींटी, तलवार हो या सुई, सबके अपने-अपने आकार-प्रकार हैं और सबकी अपनी-अपनी उपयोगिता और महत्व है। सिलाई का काम सुई से ही किया जा सकता है, तलवारे से नहीं । सुई जोड़ने का काम करती है जबकि तलवार काटने का । कोई वस्तु हो या व्यक्ति, छोटा हो या बड़ा, सबका सम्मान करना चाहिए। अपने मनपसंद दोहे को इस तरह की शैली में अपने शब्दों में लिखिए। दोहा पाठ से या पाठ से बाहर का हो सकता है। उत्तर : मनपसंद दोहा- ” बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर । पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर | ” इस दोहे का भाव है कि यदि कोई वस्तु आकार में बहुत बड़ी है पर उसका कुछ उपयोग नहीं तो वह व्यर्थ है। इसी प्रकार कोई व्यक्ति बहुत धनी और शक्तिशाली है, परंतु उसमें परोपकार, मानवता जैसे गुण नहीं हैं तो उसका बड़प्पन व्यर्थ है। ठीक उसी प्रकार, जैसे खजूर का पेड़ बहुत ऊँचा, बहुत बड़ा होता है, पर न तो वह यात्री को छाया का सुख दे पाता है, न ही कोई भूखा व्यक्ति उसके फल तोड़कर अपनी भूख मिटा सकता है। सरगम रहीम, कबीर, तुलसी, वृंद आदि के दोहे आपने दृश्य -श्रव्य (टी.वी. – रेडियो ) माध्यमों से कई बार सुने होंगे। कक्षा में आपने दोहे भी बड़े मनोयोग से गाए होंगे। अब बारी है इन दोहों की रिकॉर्डिंग (ऑडियो या विजुअल ) की। रिकॉर्डिंग सामान्य मोबाइल से की जा सकती है। इन्हें अपने दोस्तों के साथ समूह में या अकेले गा सकते हैं| यदि सभंव हो तो वाद्ययंत्रों के साथ भी गायन करें। रिकॉर्डिंग के बाद दोहे स्वयं भी सुनें और लोगों को भी सुनाएँ। उत्तर : विद्यार्थी स्वयं करें। रहीम, वृन्द, कबीर, तुलसी, बिहारी आदि के दोहे आज भी जनजीवन में लोकप्रिय हैं। दोहे का प्रयोग लोग अपनी बात पर विशेष ध्यान दिलाने के लिए करते हैं। जब दोहे समाज में इतने लोकप्रिय हैं तो क्यों न इन दोहों को एकत्र करें और अंत्याक्षरी खेलें। अपने समूह में मिलकर दोहे एकत्र कीजिए। इस कार्य में आप इंटरनेट, पुस्तकालय और अपने शिक्षकों या अभिभावकों की सहायता भी ले सकते हैं। उत्तर : विद्यार्थी स्वयं करें। आज की पहेली