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Question प्रस्तुत अपठित कविता के आधार पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
धिन-धिन-धा धमक-धमक मेघ बजे
मेघ बजे पंक बना हरिचंदन
दामिनि यह गई दमक मेघ बजे
मेघ बजे हल का है अभिनंदन
दादुर का कंठ खुला मेघ बजे
मेघ बजे धिन-धिन-धा…….
धरती का हृदय धुला
‘हल का है अभिनंदन’ में किसके अभिनंदन की बात हो रही है और क्यों ?
प्रस्तुत कविता के आधार पर बताइए कि मेघों के आने पर प्रकृति में क्या-क्या परिर्वतन हुए?
“पंक बना हरिचंदन’ से क्या आशय है ?
पहली पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
‘मेघ आए’ और ‘मेघ बजे’ किस इंद्रिय बोध की ओर संके
- ‘हल का है अभिनंदन’ में किसान और उसके हल के अभिनंदन की बात हो रही है क्योंकि वर्षा ऋतु आने और बादलों के बरसने पर कृषि का काम शुरू हो जाता है। यह काम हल द्वारा ही किया जाता है। मेघों के आने पर आकाश में गर्जना होने लगी, बिजली चमकने लगी, मेढक बोलने, धरती धुली-धुली-सी नजर आने लगी और कीचड़ नज़र आने लगा। वर्षा होने से धरती पर कीचड़ हो गया पर यह कीचड़ त्याज्य नहीं बल्कि ग्राह्य है। इसमें जीवन की आशा छिपी है। यह माथे पर लगाने योग्य होने के कारण हरिचंदन के लेप-सा प्रतीत हो रहा है। पहली पंक्ति में पुनरुक्ति प्रकाश और अनुप्रास अलंकार है। ‘मेघ आए’ में दृश्य बिंब’ होने से आँख नामक इंद्रिय बोध की ओर तथा ‘मेघ बजे’ में ‘श्रव्य बिंब’ होने के कारण ‘कान’ नामक इंद्रिय बोध की ओर संकेत है।