CBSE Class 9 Hindi Question 9 of 13

Premchand Ke Phate Joote — Question 9

Back to all questions
9
Question
पाठ में आए मुहावरे छाँटिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
Answer

- हौसला पस्त करना – उत्साह नष्ट करना। वाक्य – अनिल कुंबले की फिरकी गेंदों ने श्रीलंका के खिलाड़ियों के हौसले पस्त कर दिए । ठोकर मारना – चोट करना। वाक्य – प्रेमचंद ने राह के संकटों पर खूब ठोकरें मारी । टीला खड़ा होना – बाधाएँ आना।। वाक्य – जीवन जीना सरल नहीं है। यहाँ पग-पग पर टीले खड़े हैं । पहाड़ फोड़ना – बाधाएँ नष्ट करना। वाक्य – प्रेमचंद उन संघर्षशील लेखकों में से थे जिन्होंने पहाड़ फोड़ना सीखा था, बचना नहीं। जंजीर होना – बंधन होना। वाक्य – स्वतंत्रता से जीने वाले पथ की सब जंजीरें तोड़कर आगे बढ़ते हैं।

प्रेमचंद के फटे जूते — विस्तृत अध्ययन | Bright Tutorials
BRIGHT TUTORIALS
Bright Tutorials Logo
BRIGHT TUTORIALS
CBSE Class IX | Academic Year 2026-2027
9403781999
Excellence in Education
हिंदी | क्षितिज — प्रेमचंद के फटे जूते (विस्तृत) विस्तृत अध्ययन सामग्री

प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई | विस्तृत अध्ययन

लेखक परिचय — हरिशंकर परसाई (1924-1995)

हिंदी व्यंग्य साहित्य के शिखर पुरुष। प्रमुख रचनाएँ: विकलांग श्रद्धा का दौर, और अंत में, तब की बात और थी। साहित्य अकादेमी पुरस्कार। सामाजिक विसंगतियों पर तीखा व्यंग्य करने में सिद्धहस्त।

विस्तृत विश्लेषण

परसाई ने प्रेमचंद की तस्वीर में फटे जूतों को देखा। इस तस्वीर में प्रेमचंद अपनी पत्नी शिवरानी देवी के साथ हैं। प्रेमचंद के पैरों में कैनवास के जूते हैं जिनमें से अँगूठा बाहर झाँक रहा है, लेकिन चेहरे पर मुस्कान है।

परसाई इस विरोधाभास से प्रभावित होते हैं — फटे जूते = गरीबी + मुस्कान = आत्मसम्मान। प्रेमचंद ने कभी पैसों के लिए अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। वे ईमानदारी से लिखते रहे, भले ही गरीबी झेलनी पड़ी।

आदर्श उत्तर

प्रश्न: "फटे जूते" प्रेमचंद के किस गुण के प्रतीक हैं?

उत्तर: "फटे जूते" प्रेमचंद की ईमानदारी, सादगी और सिद्धांतों से समझौता न करने की प्रवृत्ति के प्रतीक हैं। परसाई कहते हैं कि जिस व्यक्ति के जूते फटे हैं, उसने या तो बहुत चला है या दुनिया से समझौता नहीं किया। प्रेमचंद ने चुना — ईमानदारी, भले ही जूते फटे। जिन लोगों ने समझौता किया, उनके जूते कभी नहीं फटे लेकिन उनकी आत्मा फटी। फटे जूते गरीबी नहीं, बल्कि नैतिक श्रेष्ठता के प्रतीक हैं।